दोस्तों, मेरी यह कविता एक ऐसे व्यक्तित्त्व को समर्पित है जो मेरे फ्रेंड, फिलोसोफर और गाइड है.…!!
जिन्होंने मुझे, मै बड़े सपनो का साहस करू, ऐसी दिशा दी और उन सपनो को पूरा करने का, साथ-ही-साथ उन सपनो को जीने का अवसर भी प्रदान किया ……!!
Thank you Mahesh sir for always being there for me.......!!!
This poem is for you..............
बड़ी सोच का बड़ा इनाम …… !!!!
मैंने सपनो को अक्सर टूटते हुए देखा है ,
मैंने अपनों को अक्सर रूठते हुए देखा है ,
सपना भले ही टूटे-छूटे,
पर अपने ना कभी भी रूठे …… !!!
पहला जो सपना टुटा मेरा,
तब मैंने खुद को ये समझाया,
बड़ा नहीं वो छोटा ही था,
पेड़ नहीं वो पौधा ही था,
सच नहीं बस सपना ही था…… !!!
फिर मैंने देखा दूजा सपना,
टुटा वो मेरा जो अपना,
तब मैंने मन को ये समझाया,
सपनो का तुम साहस करो,
और ख्वाब पिरोने से तुम न डरो ……!!!
अब जो आया तीजा सपना,
टूटे ना ये विचार था अपना,
जब टुटा, तब सहम गया मै,
धीर रखा और हार न मानी,
और फिर सपनो में डूबा मै ……!!!
अब सपना जो देखा मैंने,
सपने को अपना करना का,
सहज न था ये ख्वाब जो मेरा,
पर मुश्किल है ख्वाब को जीना,
पूरा ही किया, ये ख्वाब जो मेरा…… !!!
जीत का जस्बा हो मन में तो,
हर मंज़िल लगती आसान,
इसी लिए तो कहते है के,
बड़ी सोच का बड़ा इनाम
बड़ी सोच का बड़ा इनाम………!!!
जीत का जस्बा हो मन में तो,
Sometimes the dreams that come true, are the dreams you never even knew you had !!
So friends please have your own dream and do have courage to fulfill it......!!!!!!
CA Rohit Manapure
manapurerohit@gmail.com
95790 95711

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