Monday, March 24, 2014

अभिलाषा.


Everybody of us, LOVES our MOTHER very much.....
But, the pain of living away from my mother during my student life, forced me to write this for you...


This poem is for you ............MOM  !!!




* अभिलाषा *


यह मेरी अभिलाषा है।
सफल  रहु इस जीवन में,
बस इतनीसी आशा है.....!!
यह मेरी अभिलाषा है।

सुख सारे मैं माँ को दे दू,
दुःख सारे मैं ख़ुद स्वीकारू,
बस इतनी सी आशा है.....!!
यह मेरी अभिलाषा है।

खुश रहे हरदम माँ मेरी,
छाव रहे मुझ पर माँ तेरी,
जीवन का यही खुलासा है.....!!
यह मेरी अभिलाषा है।

हर जनम में माँ रहे तू मेरी,
जनम लू मैं माँ कोख से तेरी,
माँ प्यार कि परीभाषा है....!!
यह मेरी अभिलाषा है।

मैं तेरा बेटा कहलाऊ माँ,
मैं तेरे चरण पखारू माँ,
यही अब बस दिलासा है.....!!
यह मेरी अभिलाषा है,
यह मेरी अभिलाषा है ....... !!!!



CA Rohit Manapure
manapurerohit@gmail.com
95790 95711

Friday, March 21, 2014

Magic of "BIG THINKING"

दोस्तों, मेरी यह कविता एक ऐसे व्यक्तित्त्व को समर्पित है जो मेरे फ्रेंड, फिलोसोफर और गाइड है.…!!

जिन्होंने मुझे, मै बड़े सपनो का साहस करू, ऐसी  दिशा दी और उन सपनो को पूरा करने का, साथ-ही-साथ उन सपनो को जीने का अवसर भी प्रदान किया ……!!


Thank you Mahesh sir for always being there for me.......!!! 

This poem is for you..............







बड़ी सोच का बड़ा इनाम …… !!!!




मैंने सपनो को अक्सर टूटते हुए देखा है ,
मैंने अपनों को अक्सर रूठते हुए देखा है ,
                 सपना भले ही टूटे-छूटे,
                 पर अपने ना कभी भी रूठे …… !!!


पहला जो सपना टुटा मेरा,
तब मैंने खुद को ये समझाया,
                 बड़ा नहीं वो छोटा ही था,
                 पेड़ नहीं वो पौधा ही था,
                 सच नहीं बस सपना ही था…… !!!


फिर मैंने देखा दूजा सपना,
टुटा वो मेरा जो अपना,
                 तब मैंने मन को ये समझाया,
                 सपनो का तुम साहस करो,
                 और ख्वाब पिरोने से तुम न डरो ……!!!


अब जो आया तीजा सपना,
टूटे ना ये विचार था अपना,
                 जब टुटा, तब सहम गया मै,
                 धीर रखा और हार न मानी,
                 और फिर सपनो में डूबा मै ……!!!


अब सपना जो देखा मैंने,
सपने को अपना करना का,
                सहज न था ये ख्वाब जो मेरा,
                पर मुश्किल है ख्वाब को जीना,
                पूरा ही किया, ये ख्वाब जो मेरा…… !!!



जीत का जस्बा हो मन में तो,
               हर मंज़िल लगती आसान,
इसी लिए तो कहते है के,
               बड़ी सोच का बड़ा इनाम   
               बड़ी सोच का बड़ा इनाम………!!! 


Sometimes the dreams that come true, are the dreams you never even knew you had !!


So friends please have your own dream and do have courage to fulfill it......!!!!!!




CA Rohit Manapure
manapurerohit@gmail.com
95790 95711

Wednesday, March 19, 2014

A "tragi-COMEDY" Poetry on "CORRUPTION"






भ्रष्टाचार ....!!!!!



भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार , भ्रष्टाचार ……
हो  रहा जन-सैलाब  पे अत्याचार …!!!!!!

इस  सरकार  को  चड़ी है  मस्ती ,
तेल मेहंगा और दारु है सस्ती … !!
रसोई  का तुम दाम न पूछो,
आलू -प्याज़  का भाव न पूछो.... !!
पेट्रोल - बियर - दाल सब एक  बराबर ,
अब अमीर  भी  गरीब  के बराबर .... !!
महंगा राशन , महंगी बिजली , 
भ्रष्टाचार से हो रही वृधि … !!!!


चारे  से कोयले तक,  घोटाले ही घोटाले है .. !!
क्योंकि, इस सरकार  को वोट  हम  ही ने डाले है
अनपढ़  राबड़ी  बिहार  संभाले,
और तेलगी  स्टैम्प घोटाला  करे… !!
राजा 2G  का बजा  बजाये,
और कलमाड़ी CWG  कांड  करे …!!!!

मंत्री कहता हे मतदाता,
मत - दान  मुझे ही देना…… !!
पागल जनता उसे ही,
दान - मत  कर देती  है ……!!!! 

लेकिन जागो हे जनता,
नींद चैन कि त्यागो तुम,
सोच समझकर वोट ही देकर,
इस देश को बचाओ  तुम …!!!!
इस देश को बचाओ  तुम …!!!!


भ्रष्टाचार, भ्रष्टाचार , भ्रष्टाचार ……
हो  रहा जन-सैलाब  पे अत्याचार …!!!!!!






CA Rohit Manapure
manapurerohit@gmail.com
+91 95790 95711
 

Tuesday, March 18, 2014

My first poem..


हेल्लो फ्रेंड्स ………,

यह मेरी पहली कवीता है, जो मैंने अपने life पे लिखी हुई है........... 

मेरी यह कवीता मेरे  सारे struggler  फ्रेंड्स को dedicated  है…!!!!

 

 

सफरनामा  !!!!




निकल पड़े है.… मंज़िल को पाने ,
 चले चलो ऐ सफ़र के दीवाने,
अकेला चला था , अकेले चलूँगा ....... 
सफ़र के सहारो न दो साथ मेरा !!!!

 
अंजानी राहे है, अंजाने पल,
संग जीत का साया है और खुशियाँ है कल,
न प्यास है न भूक, बस मंज़िल को पाने की चाहत,
छुले  इस आसमान को बस इतनी सी है हसरत ..!!!!


किस्मत खड़ी है खोल के बाहे,
तन्हा न होगी मंज़िल की राहे,
खुद पे विश्वास  पूरा  रहे,
और आशिष बड़ो का सदा साथ रहे..!!!!

सपनो से भरे नैना है,
अब इक पल भी न चैना है,
मंज़िल को पा कर ही रहना है,
बस यही शपथ अब लेना है ..!!!!

पाक़ इरादो  को पूरा करो तुम...
थको न तुम.……, 
थमो न तुम...........,
मुड़ो न तुम.………,
बस चले चलो तुम ……… !!!!

दूर नहीं इस निशा का सवेरा,
घाव रहे इस सफ़र का गहरा.
ज़हन  में हो यादो का पहरा,
और सर  बंधेगा जीत का सेहरा .... !!!!!


निकल पड़े है मंज़िल को पाने ........!!!!




CA Rohit Manapure
manapurerohit@gmail.com
+91 95790 95711