Tuesday, March 18, 2014

My first poem..


हेल्लो फ्रेंड्स ………,

यह मेरी पहली कवीता है, जो मैंने अपने life पे लिखी हुई है........... 

मेरी यह कवीता मेरे  सारे struggler  फ्रेंड्स को dedicated  है…!!!!

 

 

सफरनामा  !!!!




निकल पड़े है.… मंज़िल को पाने ,
 चले चलो ऐ सफ़र के दीवाने,
अकेला चला था , अकेले चलूँगा ....... 
सफ़र के सहारो न दो साथ मेरा !!!!

 
अंजानी राहे है, अंजाने पल,
संग जीत का साया है और खुशियाँ है कल,
न प्यास है न भूक, बस मंज़िल को पाने की चाहत,
छुले  इस आसमान को बस इतनी सी है हसरत ..!!!!


किस्मत खड़ी है खोल के बाहे,
तन्हा न होगी मंज़िल की राहे,
खुद पे विश्वास  पूरा  रहे,
और आशिष बड़ो का सदा साथ रहे..!!!!

सपनो से भरे नैना है,
अब इक पल भी न चैना है,
मंज़िल को पा कर ही रहना है,
बस यही शपथ अब लेना है ..!!!!

पाक़ इरादो  को पूरा करो तुम...
थको न तुम.……, 
थमो न तुम...........,
मुड़ो न तुम.………,
बस चले चलो तुम ……… !!!!

दूर नहीं इस निशा का सवेरा,
घाव रहे इस सफ़र का गहरा.
ज़हन  में हो यादो का पहरा,
और सर  बंधेगा जीत का सेहरा .... !!!!!


निकल पड़े है मंज़िल को पाने ........!!!!




CA Rohit Manapure
manapurerohit@gmail.com
+91 95790 95711



4 comments:

  1. Well done rohit . . .its superb!!!����

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  2. wow.. Impressed!!!
    superb realization!!

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  3. एक अच्छी शुरुवात ,
    ले जायेगी मंजिल के पास ,
    ये है हमें पूरा विश्वास....

    --- हेमा निरजेश वर्मा.

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  4. मै आपके बहुमूल्य सुझावो के लिए आप सभी का शुक्रिया अदा करता हूँ !!!

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